राजस्थान का एकीकरण
GK TRICK :- मत्सय संघ में शामिल रियासतें व ठिकाने
अभी ना धोक
- अ - अलवर
- भी - भरतपुर
- ना - नीमराणा (ठिकाना)
- धो - धौलपुर
- क - करौली
Purav Rajasthan Sangh /पूर्व राजस्थान संघ ( दूसरा चरण)
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| पूर्व राजस्थान संघ |
कुछ ही दिन बाद दक्षिण पूर्वी और दक्षिण की 9 रियासतों ने मिलकर संयुक्त राजस्थान नाम के संघ का गठन किया । इसमें बांसवाड़ा कोटा बूंदी टोंक झालावाड़ प्रतापगढ़ शाहपुरा(
Rajasthan ki sabse chhoti riyasat) किशनगढ़ और डूंगरपुर नाम का रियासतें कुशलगढ़ व लावा शामिल थे । कोटा को संयुक्त राजस्थान की राजधानी बनाया गया। महाराव भीमसिंह( कोटा ) पूर्व राजस्थान संघ के राजप्रमुख बने तथा बूंदी के महाराजा बहादुर सिंह इसके उप राजप्रमुख बने बने। गोकुल लाल आसावा को पूर्व राजस्थान संघ का प्रधानमंत्री बनाया गया।
GK TRICK:- राजस्थान में शामिल रियासतें व ठिकाने
शाह बाबू की झाडू को पटको
- शाह - शाहपुरा
- बा - बाँसवाड़ा
- बू - बून्दी
- की - किशनगढ
- झा - झालावाड़
- डू - डूँगरपुर
- को - कोटा
- प - प्रतापगढ
- टको - टोंक
Sanyukt Rajasthan - संयुक्त राजस्थान (तीसरा चरण)
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| संयुक्त राजस्थान |
तीन हफ्ते बाद मेवाड़ यानी उदयपुर रियासत (Rajasthan ki sabse prachin riyasat) भी इस संघ में शामिल हो गया संयुक्त राजस्थान नाम के इस संघ की राजधानी उदयपुर को बनाया गया। राजप्रमुख मेवाड़ के महाराणा भूपाल सिंह बने तथा माणिक्य लाल वर्मा को प्रधानमंत्री बनाया।Vrihat rajasthan - वृहत्त राजस्थान (चौथा चरण)
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| वृहत्त राजस्थान |
अगले साल यानी 30 मार्च 1949 ईस्वी (rajasthan diwas 30 march ko manaya jata hai)में बची हुई चार रियासतें भी इस संघ में शामिल हो गई। अतः अब संयुक्त राजस्थान संघ में जयपुर(jansankhya ki drishti se rajasthan ki sabse badi riyasat), जोधपुर (rajasthan ki sabse badi riyasat) जैैैसलमेर बीकानेर भी शामिल हो चुके थे। संघ का नाम बदलकर वृहत्त राजस्थान रख दिया गया। वृहत राजस्थान की राजधानी बना जयपुर और इसके महाराज प्रमुख बने मेवाड़ के महाराणा भूपाल सिंह व राज प्रमुख बने जयपुर के मानव सिंह तथा पंडित हीरालाल शास्त्री को प्रधानमंत्री बनाया गया पूरा नाम भारतीय संविधान के लागू होने के बाद सारे देश में राज्यों के प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री कहा जाने लगा।Sanyukt Vrihattar Rajasthan संयुक्त वृहत्तर राजस्थान (पांचवा चरण)
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| संयुक्त वृहत्तर राजस्थान |
15 मई 1949 ईस्वी को मत्स्य संघ भी वृहत्त राजस्थान में शामिल हो गया।इसे संयुक्त वृहत्तर राजस्थान कहा गया। मत्स्य संघ के विलय से पूर्व इस क्षेत्र की जनता का जनमत जानने के लिए शंकर देव समिति का गठन किया गया तथा इसकी सिफारिश पर ही विलय किया गया। Rajasthan Sangh - राजस्थान संघ (छठा चरण)
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| राजस्थान संघ |
अभी तक केवल सिरोही ही ऐसी रियासत थी जिसका राजस्थान में विलय नहीं हुआ था । 26 जनवरी 1950 ईस्वी को जब भारत का पहला गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था इस समय देलवाड़ा एवं आबू क्षेत्र के अलावा बाकी सिरोही रियासत अभी राजस्थान का हिस्सा बन गई। भारत सरकार द्वारा गठित भारतीय राज्य पुनर्गठन आयोग के कहने पर 1956 ईस्वी में मेरवाड़ा के इलाके को भी राजस्थान में मिला दिया गया। साथ ही मध्यप्रदेश के सुनेल टप्पा और सिरोही की देलवाड़ा एवं आबू तहसील को भी राजस्थान का हिस्सा बना दिया गया तथा राजस्थान का सिरोंज मध्य प्रदेश में मिला दिया गया ।इसी समय भारत एक संप्रभुत्वसंपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया और राज्य को राजस्थान के नाम से उल्लेखित किया गया।
Adhunik Rajasthan -आधुनिक राजस्थान (सातवां चरण)
इस तरह वर्तमान राजस्थान का 1 नवंबर 1956 ईस्वी को एकीकरण हुआ। इसीके साथ राजप्रमुख का पद समाप्त हुआ व राज्यपाल का पद सृजित हो गया। राज्य की राजधानी जयपुर बनाया गया और राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया बने वहीं गुरुमुख निहाल सिंह राजस्थान के प्रथम राज्यपाल बने। किंतु राजस्थान दिवस वृहत राजस्थान के आधार पर 30 मार्च को ही मनाया जाता है।राजस्थान के एकीकरण में कुल 8 वर्ष 7 माह और 14 दिन लगे। वर्तमान राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी आबादी 2011 की जनगणना के आधार पर 6 करोड़ से भी ज्यादा है। वर्तमान समय में राजस्थान में सात संभाग और 33 जिले हैं।GK TRICK :- राजस्थान के एकीकरण में प्रथम चरण से सप्तम चरण तक के नाम
MP से VSR आया
- M - मत्सय संघ
- P - पूर्व राजस्थान संघ
- से - संयुक्त राजस्थान
- V - वृहत राजस्थान
- S - संयुक्त वृहत्तर राजस्थान
- R - राजस्थान संघ
- आ - आधुनिक राजस्थान
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